स्टीफन हॉकिंग क्यों कहा था-पृथ्वी दो-चार शताब्दियों में बर्बाद हो जाएगी

जीते जी किवंदती बन चुके विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का 76 की उम्र में निधन हो गया। विश्व को ब्रह्माण्ड के रहस्य बताने वाले इस महान वैज्ञानिक ने कई दशक व्हील चेयर पर गुज़ारे।

महज 21 वर्ष की छोटी उम्र में डॉक्टरों ने उन्हें मोटर न्यूरोन नामक लाइलाज बीमारी से ग्रस्त बताया था। तब आज तक वे व्हीलचेयर पर अपनी ज़िंदगी गुजार रहे थे। उस समय डॉक्टर्स ने उन्हें कहा था कि वह ज्यादा से ज्यादा दो साल तक जी सकेंगे लेकिन अपनी जीने की जिजीविषा के मानवता की सेवा के प्रति जुनून ने उन्हें आज तक जीवित रखा।

ब्रह्मांड के रहस्यों पर उनकी किताब ‘अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ काफी चर्चा में रही थी। इस किताब में स्टीफन ने बिग बैंग सिद्धांत, ब्लैक होल, प्रकाश शंकु और ब्रह्मांड के विकास के बारे में नई खोजों का दावा कर दुनिया भर में तहलका मचा दिया था।

स्टीफन हाकिंग अपने इंटरव्यू से कई बार दुनिया को चौंकाते रहे हैं। उनका कहना था कि आज मानव समुदाय इतिहास के सबसे खतरनाक समय का सामना कर रहा है। आज हम आपको स्टीफन हाकिंग की कुछ ऐसी है चेतावनी के बारे में बता रहे।

उन्होंने अपने एक बयान में कहा था कि यदि जल्दी ही पर्यावरण और तकनीकी चुनौतियों से निपटने का तरीका ईजाद नहीं किया गया तो परिस्थितियां बद से बदतर हो जाएगी। यदि इन तमाम बातों पर ध्यान नहीं दिया तो पृथ्वी एक दिन बर्बादी की कगार पर पहुँच जाएगी।

स्टीफन ने विश्व को उच्चतर जीवन शैली को त्यागने का आह्वान किया था। उनका कहना था कि आजीविका के संसाधन लगातार कम होते जा रहे हैं। वहीं दुनिया जबरदस्त पर्यावरण और तकनीकी समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे में मानवता को बचाने के लिए संगठित होकर समन्वय से काम करने की जरूरत है।

उन्होंने जलवायु परिवर्तन, आर्थिक उत्पादन, बढ़ती जनसंख्या, वन्य प्रजातियों की तबाही बढ़ते संक्रामक रोग और महामारियां तथा महासागरों व नदियों का अम्लीकरण जैसे मुद्दों पर दुनिया को चेताया था। उन्होंने अपने लेख में कहा था कि आज मानवता अपने विकासक्रम में सबसे ज्यादा भयावह संकटों से जूझ रही है। ऐसे में दुनिया को हमें बचाना होगा।

साथ ही हॉकिंग यह कहकर दुनिया को हैरान कर दिया था कि अब से धरती पर प्रलय की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। इसका जिम्मेदार उन्होंने पृथ्वी पर बढ़ते तापमान, आनुवांशिक अभियांत्रिकी वायरस को बताया था। यदि दुनिया में यही स्थिति रही तो पृथ्वी दो-चार शताब्दियों में बर्बाद हो जाएगी।

2007 में अपने एक बयान में उन्होंने कहा था कि यदि ग्लोबल वार्मिंग समाप्त नहीं हुई तो धरती एक दिन शुक्र ग्रह में तब्दील हो जाएगी। उन्होंने चेताया था कि औद्योगिक व प्रौद्योगिक क्रांति के बाद धरती का औसत तापमान 0.8 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है। कोयला और पेट्रोलियम पदार्थों के अकूत दोहन से ग्रीन हाउस को प्रभावित करने वाली कई गैसों का उत्सर्जन हुआ। इससे धरती का प्राकृतिक संतुलन लड़खड़ा गया।

साथ ही हाईड्रो-क्लोरो-फ्लरो कार्बन (एचएफसी), हेलोंस, मेथाइलक्लोराइड, मेथाइलब्रोमाइड और कार्बन टेट्राक्लोराइड ऐसी गैसें हैं, जो तापमान बढ़ाने के साथ ओजोन की परत को हानि पहुंचा रही हैं। इन गैसों का उपयोग एसी, फ्रिज, इत्र, डियो, शेविंग फॉर्म, कूलेंट ऑयल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बोर्ड की सफाई में बड़ी मात्रा में होता है।

साथ ही स्टीफन हॉकिंग ने आनुवांशिक अभियांत्रिकी द्वारा घातक वायरसों के पैदा करने की प्रक्रिया को भी खतरनाक बताया है। उन्होंने इबोला वायरस को इसी मॉडीफाइड जेनेटिकली इंजीनियर्ड का कारक बताया था।

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